देश में शांति का पाठ भी बने शिक्षा का हिस्सा, शांति के लिये भी हो मंत्रालय:राजगोपाल

Posted On : 2017-02-21 08:10:11     

  बुद्ध-गांधी के देश में तैयार हों शांति दूत: राजगोपाल

2017-02-21 08:10:11

भोपाल। एकता परिषद के तीन दिवसीय युवा प्रशिक्षण शिविर में देश के प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एवं एकता परिशद के संस्थापक डा. पी.व्ही.राजगोपाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश की शिक्षा में शांति का पाठ भी शामिल होना चाहिये, पूरी दुनिया शांति अहिंसा के लिये भारत का अनुसरण करना चाहती है।  

उंहोने कहा कि पूरी दुनिया भारत ने ही शांति का संदेश दिया था और आज भी पूरा विश्व हमारी तरफ ही इस आशा से देश रहा है। गौतम बुद्ध, महात्मा गांधी जैसे महान विभूतियों के देश पर ही आज अहिंसा, शांति को दुनिया में दोबारा से स्थापित करने की जिम्मेदारी आ गई है। और हम अपने स्वर्णिम इतिहास और दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचा नहीं पा रहे है। ये हमारे देश में ही संभव है कि डकैतों की कुख्यात घाटी चंबल में 5 सेंकड़ा से ज्यादा बागियों ने एक साथ हिंसा छोड़कर समाज में शांति की राह पकड़ी। और एसे ही ना जाने कितने उदाहरण हैं जिनसे हमने पूरी दुनिया को अहिंसा और शांति के लिये प्रेरित किया। 

डॉ राजगोपाल ने कहा है कि अभी भी देर नहीं हुई है और देश की शिक्षा में प्राथमिक स्तर से अहिंसा और शांति की शिक्षा को शामिल किया जा सकता है जिससे आने वाली पीढ़ी पूरी दुनिया को सिखा सके कि विपरीत स्थियों में भी शांति को अपनाया जा सकता है। देश और प्रदेशों में शांति मंत्रालय भी होना चाहिये। जब हिंसा के लिये रक्षा मंत्रालय और ग्रह मंत्रालय हैं तो शांति के लिये क्यों नहीं ?

भोपाल गांधी भवन में चल रहे युवा शिविर में 200 प्रतिभागियों के साथ एकता परिशद के राष्ट्रीय संयोजक श्रद्धा कष्यप, अनीश कुमार, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, निर्भय सिंह, संतोश सिंह, जनवकालत समन्वयक मनीश राजपूत, प्रदेश संयोजक दीपक अग्रवाल, मीडिया प्रभारी विनोद कुमार, एकता परिषद के कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। 


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